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मेरे बाबू जी

मेरे बाबू जी समस्त गुणों का भंडार थे मेरे बाबू जी हम सब बच्चो का संसार थे मेरे बाबू जी जमाने भर की खुशियां बांटते थे हमसे आप ही हमारा पूरा परिवार थे बाबू जी। जैसे आप गए छोड़कर वैसे कहा कोई जाता है देह त्यागने से पहले कौन भगवान भजन गाता है। सच है की आप भगवान का अवतार थे बाबू जी हम सब बच्चो का सारा संसार थे बाबू जी जितना आपने किया उतना कहा कोई करता है खुद की परवाह छोड़ नाती पोतों पर मरता है प्यार को परिभाषित करे तो प्यार थे बाबू जी हम सब बच्चो का सारा संसार थे बाबू जी।। कार्यरत रहते हुए भी अपने लिए कहां कुछ किया है पाई पाई जोड़कर केवल और केवल दिया ही दिया है। हम सब जहां है सब आपके ही उपकार थे बाबू जी। हम सब बच्चो का सारा संसार थे बाबू जी।। मां बाप से ज्यादा हमेशा हमे वो लाड़ देते थे। हर संकट के सामने होकर हमे वो आड़ देते थे। आप ही से हम और सारे तीज त्योहार थे बाबू जी हम सब बच्चो का सारा संसार थे बाबू जी। दिन भर की बात को सहेज समेट वो रखते थे। दो घड़ी समय बिताने को साथ सबकी राह तकते थे। आपसे ही सारे सपने थे, सब साकार थे बाबू जी हम सब बच्चो का सारा संसार थे बाबू जी। आपने सब किया बस कुछ कम ...

मनसंगी परिचय

  मनसंगी साहित्य संगम   यह एक ऐसा मंच है जो कि हिन्दी साहित्य के विकास के लिए कार्य करता है । इस हेतु कुछ बिंदु निम्नानुसार है। * हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु मनसंगी साहित्य संगम समूह कार्य करता है।जिसके संस्थापक श्री अमन राठौर जी और सहसंस्थापिका श्रीमती मनीषा कौशल जी हैं। *मनसंगी साहित्य संगम समूह की स्थापना दिनांक 15 जून 2021 को हुई। *मनसंगी ने अब तक 15 से ज्यादा वर्चुअल कवि सम्मेलन 5 से ज्यादा open mic किये है। अब तक 3 पत्रिकाओँ का प्रकाशन हुआ है जिसका शुभारंभ संस्थापक महोदय जी के जन्मदिन 11 अगस्त 2021 से हुआ। *इसका सफल प्रथम प्रकाशन 10 सितंबर गणेश चतुर्थी पर हुआ।  *मन संगीत साहित्य पत्रिका के माध्यम से हिंदी साहित्य के इतिहास को लेकर पत्रिका का प्रथम संस्करण का विमोचन किया गया जिसमें हिंदी साहित्य की गद्य विधाओं पर विभिन्न रचनाकारों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया‌। *हिंदी दिवस के उपलक्ष पर श्री भवंस भारती पब्लिक स्कूल भोपाल मैं शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा लघु कथा, कविता पाठ, रस के द्वारा सभी ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। *मुक्त शैली के आधार पर मनसंगी स...